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देश के 80 लाख करोड़ रुपया हिंसा के शिकार होखता, का भाजपा अवुरी मोदी एकरा से कुछ सीखिहे

केंद्र के वर्तमान सरकार के शासन के दौरान देश में बढ़त हिंसा अवुरी ओकरा से होखत नुकसान के मामला में घेरत कांग्रेस पार्टी कहलस कि का भाजपा अवुरी प्रधानमंत्री एकरा से कुछ सीखे पईहे।

एगो रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान पछिला एक साल (2017-18) में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 9 प्रतिशत हिंसा के चलते बर्बाद हो गइल। एही रिपोर्ट के हवाला देत कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला मोदी सरकार अवुरी भाजपा प हमला बोलले।

सुरजेवाला एगो ट्वीट में कहले, “का मोदी जी आ भाजपा कबहूँ समझे पाई कि ‘विभाजन’, असहनशीलता, कटुता, अन्याय अवुरी विचार के अतिवाद वाली नीति के चलते भईल हिंसा से भारत के जीडीपी प 80 लाख करोड़ रुपया के चोट 2017-18 में पहुंचल?”

इंस्टीट्यूट फॉर इक्नोमिक्स एंड पीस के एगो रिपोर्ट के मुताबिक पछिला साल भईल हिंसा के चलते प्रति व्यक्ति 40 हज़ार रुपया से अधिका के दर से भारतीय अर्थव्यवस्था के 80 लाख करोड़ रुपया से जादे के नुकसान भईल। रिपोर्ट बनावे वाला इंस्टीट्यूट 163 देश के अर्थव्यवस्था के अध्ययन कईला के बाद एकर नतीजा जारी कईले बिया

एकरा बाद बैंकिंग क्षेत्र अवुरी नगदी के चलन में भईल बढ़ोतरी के मामला में केंद्र सरकर के घेरत रणदीप सिंह सुरजेवाला कहले कि भारतीय अर्थव्यवस्था बदहाली में बिया जबकि बैंकिंग क्षेत्र खतरा में बाटे।

उ कहले कि वित्त वर्ष 2017-18 में बैंकिंग क्षेत्र के घाटा बढ़ के 80,000 करोड़ के पार क गइल, जबकि खराब लोन (अईसन कर्ज जवना के उगाही संभव नईखे) के मात्रा बढ़ के 10,30,000 करोड़ पहुँच गइल।

नोटबंदी के फैसला प सवाल उठावत सुरजेवाला कहले कि “हैरानी ना होखे के चाही, ‘कैश इज किंग’ – नोटबंदी के बाद नकदी के मात्र 8.9 लाख करोड़ से बढ़ के 19.3 लाख करोड़ पहुँच गइल अवुरी ‘कैशलेस इकॉनमी’ एगो जुमला बन गइल।”

मालूम रहे कि नोटबंदी के दौरान सरकार के ओर से बाकी सभ कारण के संगे कहल रहे कि इ फैसला देश के अर्थव्यवस्था में नकदी के चलन कम करे खाती भईल। हालांकि ओ समय भुगतान के बाकी माध्यम जईसे कि क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड अवुरी ऑनलाइन से लेनदेन के संख्या अवुरी मात्रा में बढ़ोतरी भईल रहे लेकिन रिजर्व के ताज़ा आंकड़ा के मुताबिक नोटबंदी से पहिले के मुक़ाबला में आज नकदी के चलन 30 प्रतिशत से जादे बढ़ गइल बा।

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