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नीतीश कुमार लगे अब का बाचल बा, सुशासन बाबू अब का करीहे

गुरुवार के आईल उपचुनाव के नतीजा के असर त लगभग सभ प्रमुख दल प देखाई दिही, लेकिन एकर सबसे गंभीर असर बिहार में सत्ताधारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जदयू प लऊकी।

महागठबंधन छोड़ला के बाद नीतीश कुमार लगातार दूसरा बेर तेजस्वी यादव जईसन कथित ‘नौसिखिया’ के अगुवाई वाली राजद से हारल बाड़े। जहानाबाद में जब पहिला बेर हरले त ‘सहानुभूति के लहर’ बतावत संतोष कईले। असहूँ उ सीट राजद के रहे, एहसे जदयू के हार के जादे चर्चा ना भईल।

अबकी बेर जोकीहाट में नीतीश कुमार के हार भईल बा। इ सीट ना त राजद के रहे, ना एहीजा सहानुभूति जईसन कवनो चीज़ रहे। ए सीट प जदयू के उम्मीदवार 2005 से लगातार जीतत आईल रहले।

जोकीहाट उपचुनाव के प्रचार में खुद नीतीश कुमार पूरा लाव-लश्कर के संगे मैदान में उतरल रहले। जदयू के तमाम वरिष्ठ नेता के संगे करीब एक दर्जन मंत्री ए सीट खाती प्रचार कईले, एकरा बावजूद 41 हज़ार वोट से जदयू के उम्मीदवार हार गइल।

लगभग 70 प्रतिशत अल्पसंख्यक के आबादी वाली जोकीहाट विधानसभा में नीतीश कुमार के पार्टी के हालत “वोट कटुआ” जईसन रह गइल। राजद के उम्मीदवार जतना वोट के अंतर से जीतल, ओतना वोट नीतीश कुमार के उम्मीदवार के ना मिलल।

मतलब साफ बा कि बिहार के करीब 15 प्रतिशत आबादी वाला अल्पसंख्यक समुदाय अब नीतीश कुमार के हाथ से छटक गइल बा। जदी जदयू ए सच्चाई के माने से इनकार करतिया त ओकरा बतावे के होई कि पार्टी के वोट काहें ना मिलल। जीत-हार से जादे बड़ सवाल बा कि राजद अवुरी जदयू के वोट में एतना अंतर काहें?

नीतीश कुमार 1994 में समता पार्टी बनवले रहले अवुरी 1995 में पहिला बेर समता पार्टी चुनाव लड़ले रहे। जदी 1995 के चुनाव के छोड़ दिहल जाए त 2014 के लोकसभा चुनाव तक नीतीश कुमार के पार्टी के कम से कम 16-17 प्रतिशत वोट मिलल, जवना में राज्य के अल्पसंख्यक मतदाता के बहुत बड़ भूमिका रहे।

अब जबकि साफ-साफ देखाई देता कि राज्य के अल्पसंख्यक मतदाता नीतीश कुमार के संगे नईखन त सवाल बा कि नीतीश कुमार का करीहे? एकरो से बड़का सवाल बा कि नीतीश कुमार लगे का बाचल बा?

जातिगत वोटबैंक बिहार के राजनीति के सच्चाई बा। लालू लगे यादव अवुरी मुसलमान मतदाता बाड़े, भाजपा लगे सवर्ण मतदाता बाड़े, कांग्रेस लगे सवर्ण, मुसलमान अवुरी दलित मतदाता के मिश्रण बा, नीतीश लगे अब का बा? उ कवना आधार प एनडीए गठबंधन में बड़ भाई कहईहे? जदी बड़ भाई ना रहीहे त बिना मुख्यमंत्री के कुर्सी के नीतीश कुमार का करीहे?

जदी जोकीहाट उपचुनाव के नतीजा जदयू के पक्ष में आईल रहीत त नीतीश के सहारा मिलित, भाजपा संगे मोल-भाव करे ताकत मिलित, लेकिन अब का?

भाजपा के नेता बहुत दिन से कहतारे कि नीतीश कुमार गठबंधन प बोझ बाड़े, अब इनिकर कवनो राजनीतिक हैसियत नईखे, अयीसना में भाजपा के छोड़ला के बाद नीतीश कुमार कहाँ जईहे? अब उ ना त भाजपा के सोझा ज़ोर से बोल सकतारे, ना कांग्रेस-राजद के सोझा खाड़ा हो सकतारे, एहसे हो सकता कि उ रामविलास पासवान अवुरी उपेंद्र कुशवाहा संगे तालमेल बनावस।

लेकिन पासवान अवुरी कुशवाहा के राजनीतिक हैसियत के अंदाज़ा पिछला विधानसभा चुनाव में मिल चुकल बा। अयीसना में जदी नीतीश कुमार तीसरा रास्ता प डेग बढ़ावतारे त शायदे कवनो फायदा होई। हाँ नुकसान बढ़ जाए के संभावना जरूर बा।

सभके नज़र अब नीतीश कुमार प लागल बा। सभ देखल चाहता कि एक समय प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहल नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के कुर्सी के बचावे खाती अब कवना राह प डेग धरतारे।

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