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ऑनलाईन भईल जेब आइल गजब झोल झमेल

ऑनलाईन भईल जेब आइल गजब झोल झमेल सटऽले त गईले बेटा, लटऽकऽल त पुलिस के डंडा, बुरी नजर वाला तोहर मुंह काला, हसीना के जिनगी बिस्कुट अउरी  केक पर ड्राईवर के  जिनगी क्लच अउरी ब्रेक प, उच्चकन अउरी जेबकतरन से सावधान, अईसन शेर आ संदेश नबे के दशक में देश के छोट बड़ शहरऽन कऽ बस आ ट्रकऽन प चार चॉद लगावत रहे। वोह घरि अइसन कवनों सवारी ना होत…

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देश में एगो बरियार मुस्लिम महिला आन्दोलन के जरूरत

देश में कव दशक से धर्म के नाम प वोट बैंक के राजनीति होत रहल बा। हरेक चुनाव में बस इहे सुने के मिलल बा कि हम‘मुस्लिम खातिर हई कर देब हउ कर देब’। लेकिन सच्चाई इ बा कि इ सब कहके सच्चा हितैषी बने खेल त शुरू हो जाला लेकिन कोई कुछ ना करे। एह शोर में मुस्लिम समाज के असली चुनौति मुद्दा बने से अछूता रह जाला। राजनीती…

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परेम : समर्पण आ विश्वास

  फरवरी माह के आरंभ होत नवका पीढ़ी मे कुछ नया कुलबुलाहट देखे के मिलता । फलना दिवस आ चिलना सप्ताह पहिले त इ सब झमेला ना रहल ह । हमनी के देश मे प्रेम त सबसे अद्बभुत बा । इहां प्रेम के प्रतीक राधा कृष्ण के जोड़ी मानल जाला । हमनी के इहवा बसंत मास ही पुरा प्रेम पर समर्पित बा । कृष्ण जहां राधा के संग रास रचावत…

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पद्मश्री के तंगहाली में मौत छोड़ गइल अनेक सवाल

जिनगी से बड़का कुछु ना होला,  जब जिनगी ही ना रही त कवनो सभाखन चाहे कवनो पुरस्कार का करी । ८ फरवरी रात नौ बजे पेट के दरद आ खुजली के शिकायत पर मशहूर पंडवानी गायक पद्मश्री पूनाराम निषाद के सस्पेंड भर्ती करावल गइल आ शनिचर के दुपहर दु बजे उ काल के गाल मे समा गइलन । घर वाला लोगन के कहनाम रहे कि अस्पताल मे भर्ती भइला के…

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एह लोकतंत्र में औरतन के अच्छा दिन कब आई ?

भारतीय स्त्री सुनत मन मे जे छवि आवेला उ माई , भौजाई चाहे बहिन के होखेला.साड़ी पहिनले, सेनुर चुड़ी धारण कईले आ व्रत त्यौहार करत माई , हंसी ठिठोली करत भौजाई चाहे समुचे घर फिरके लेखा घूमत बहिनिया , जमाना चाहे कतनो आगे बढ़ गईल होखे ,हमार मन मे त इहे छवि प्रकट होखेला  । आज  आजादी के कई साल बाद भी अउरी गणतंत्र लागु होखे के अनेको साल बाद…

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भारतीय संविधान लोकतांत्रिक मूल्यन के संघर्ष

आजादी के तुरंत बाद हमनी के जवन संविधान अपनइनीजा अउरी बाद में समयानुसार संसोधन कईल गईल ओकरा हिसाब से सही मायना में समानता प आधारित एगो लोकतांत्रिक समाज दने बढ़त बढ़त अब तक ले जाती धर्म अउरी संस्कृति के तमाम दबाव से मुक्त हो गईल चाहत रहे| स्वतंत्रता के लगभग 70 साल बाद दलित, गरीब, आदिवासी, अल्पसंख्यक अउरी औरतन के स्तिथि के कवना मापदंड से मापल जाव| एह समूह के…

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मकर-संक्रांति पर खिचड़ी के खींचखाँच

खिचड़ी खइला पर पेट के कवनो हानि ना उठावे के पड़ेला। एहीसे हलुक भोजन शायदे कुछु दोसर होई। ई एगो लोकप्रिय भारतीय खाजू ह जवना के दाल आ चाउर के एक्के साथे उबाल के पकावल जाला। हमार माई हमे स्वादानुसार अउरिओ आइटम डालें। ई खिचड़ी पेट के रोगी लोग खातिर विशेष रूप से उपयोगी ह। ई त एकर पाचकीय आ औषधीय गुण भइल बाकिर भारतीय समाज के विराटता के दृष्टि…

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नक्सलवाद एगो गंभीर समस्या

  भारत के आजाद भईला लगभग 70 साल होखे जा रहल बा, लेकिन हमनी के देश में आजो एगो अइसन समूह बा जवन दुनिया के सबसे बड लोकतान्त्रिक कहाए वाला देश के लोकतंत्र में विश्वास ना रखे| नक्सलवाद देश के एगो गंभीर समस्या बन चुकल बा| इहाँ तक कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कह चुकल बाड़े किनक्सलवाद भारत के राष्ट्रिय सुरक्षा खातिर एगो बड खतरा बा| जब भी…

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सत्ता, साहित्य आ अकादमी के कार्यक्रम

    गणतंत्र दिवस आवे आला रहे त अकादमी के एगो कार्यक्रम मजबूरी में करावें के रहे। काहे कि अगर कार्यक्रम ना होई त फेरु अकादमी के नाम पर मलाई कइसे चाभल जाई । देख दाख के एगो औडिटोरियम बुक हो गईल आ जब औडिटोरियम बुक होई गईल कवि सम्मेलन के नाम पर त कुछेक कविओ लोग चाही कविता पढ़े खतिरा । अकादमी के शीर्ष भारत में राजनीति पार्टी के…

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एगो त्रिवेणी ईहवों बा

मन में घुमे के उछाह, सुन्दरता के आकर्षण आ दू देशन के राजनैतिक सीमा के बतरस के त्रिवेणी में बहत ही हम त्रिवेणी जात रहनी। हमनी के छह संघतिया रहनी जा आ एगो जीप के ड्राईवर। हमरा के छोड़ के सभे एह प्रान्त से परिचित रहे। हमरा बेचैनी के एगो इहो कारन रहे की आजू ले हम त्रिवेणी स्थान के नाम इलाहबाद के संगम खातिर सुनले रहनी। ई त्रिवेणी कवन…

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