गांधी जी के तीन बानर

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October 1, 2017

आजू आपन देश कऽ हर छोट बडऽ शहर होखे चाहे विदेश हर जगह गांधी जी के तीन बानर के मुर्ति चौक चउराहा पऽ लागल मिल जाई। ई बड़ा ही मार्मिक आ ज्ञान देबे वाला होले। ई तीनो मुर्ति , तीन सिखऽन, बुरा मत देखऽ , बुरा मत सुनऽ , आ बुरा मत बोलऽ, के मतलब जईसन बड़हऽन ज्ञान के प्रतिक ह । एकर मतलऽब देश , काल आ आदमी के…

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हर रंग में रंगाइल : ‘फगुआ के पहरा’

phaguaa ke pahra
July 6, 2017

              एगो किताब के भूमिका में रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव ऊर्फ जुगानी भाई लिखले बाड़े कि ‘भाषा आ भोजन के सवाल एक-दोसरा से हमेशा जुड़ल रहेला। जवने जगही क भाषा गरीब हो जाले, अपनहीं लोग के आँखि में हीन हो जाले, ओह क लोग हीन आ गरीब हो जालंऽ।’ ओही के झरोखा से देखत आज बड़ा सीना चकराऽ के कहल जा सकत बा कि भोजपुरी समृद्ध बा, भोजपुरिया मनई समृद्ध बा।…

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बिला रहल थाती के संवारत एगो यथार्थ परक कविता संग्रह “खरकत जमीन बजरत आसमान”

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June 2, 2017

मनईन के समाज आउर समय के चाल के संगे- संगे  कवि मन के भाव , पीड़ा , अवसाद आउर क्रोध के जब शब्दन मे बान्हेला , त उहे कविता बन जाला । आजु के समय मे जहवाँ दूनों बेरा के खइका जोगाड़ल पहाड़ भइल बा , उहवें साहित्य के रचल , उहो भोजपुरी साहित्य के ,बुझीं  लोहा के रहिला के दांते से तूरे के लमहर कोशिस बा । जवने भोजपुरी…

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ऑक्सीजन से भरपूर ‘पीपर के पतई’

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June 2, 2017

कहल जाला कि प्रकृति सबके कुछ-ना-कुछ गुण देले आ जब ऊहे गुण धरम बन जाला त लोग खातिर आदर्श गढ़े लागेला। बात साहित्य के कइल जाव त लेखन के साथे ओह धरम के बात अउरी साफ हो जाला। ‘स्वांतः सुखाय’ के अंतर में जबले साहित्यकार के साहित्य में लोक-कल्याण के भाव ना भरल रही, तबले ऊ साहित्य खाली कागज के गँठरी होला। बात ई बा कि अबहिने भोजपुरी कवि जयशंकर…

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जिनगी के हर कोना के उकेरत ‘जिनगी रोटी ना हऽ’

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June 2, 2017

आजु के जुग मे जहवाँ रिश्तन के जमीन खिसक रहल बा, अपनत्व के थाती बिला रहल बा, उहवें एकरा के जीयल, ऊहो जीवंतता के संगे, एगो मिशाल हऽ । जवने समय में मनई अपने माई भाषा के बोले मे शरम महसूस करत होखो, ओही समय मे अपना माई भाषा बोलल आउर ओहू से बढ़ि के ओह में साहित्य रचल एगो लमहर काम बाटे। अपना दूसरका भोजपुरी कृति ‘जिनगी रोटी ना…

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अपना धुन में बहा ले जाई रमबोला

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December 12, 2016

हरीन्द्र हिमकर जी के लिखल “ रमबोला ” के पहिला संस्करण १९७७ में आइल रहे । इ एगो भोजपुरी खंड काव्य ह । हरीन्द्र हिमकर जी अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के स्थाई सदस्य बानी आ चंपारण के धरती से भोजपुरी के झंडा बड़ी मजबूती से पकड़ले अभी आगे बढ़ रहल बानी । एकर दोसरका संस्करण नवारम्भ प्रकाशन पटना से २०१६ में छपल बा जेकर दाम १५० रुपया रखाइल बा ।…

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पूर्वांचल के संस्कृति के अनुरूप रचल बा “गीत – गगन”

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November 17, 2016

शिवालिक प्रकाशन , दिल्ली से छपल “ गीत – गगन ” जवन श्री देवेन्द्र नाथ तिवारी के सम्पादन मूल रूप से गीत आ गजल संग्रह ह । डॉ. जौहर शफियाबादी भोजपुरी साहित्य में एगो मजबूत खम्भा के नाम ह जे मजबूती से भोजपुरी भाषा – साहित्य अउरी भोजपुरी मान्यता आन्दोलन के दिशा देवे में आपन अग्रणी भूमिका निभवले बानी आ अभियो निभावत बानी । “ गीत – गगन ” के रचनाकार…

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