कविता
-
माटी के अँजोर / जितराम पाठक
सूप भरि रूप केसनूख भरि सोहुआ मेंसानल सनेहिया सलोरआन अवरू अपना केनेह-नाता गरगटलहना के बाटुरे बटोर।सोनवा के जाल मेंघेराइल सारी दुनियायोग के वियोग में पेराइल सारी दुनियाकिरन के बानकेहू मारेला अनेरियामाटी के सुवास छिलरावेला अहेरियादेहिया के नाता नधले बाझकझोरियाअन्हरा के…
आपन हमदर्द/ दीपक तिवारी
माई जइसन,प्यार करे,ना करि केहू,आपन हमदर्द,चाहें केतनो, होई सेहूँ। माई…
आमवा से अमरित टपके/…
आमवा से अमरित टपके ,चह-चह चहके चिरइयाँ.महुआ सुगंध में मातल,कुकू…
आवे बसन्त दुअरिया /…
आवे बसन्त दुअरियामगन मन नाचले गोरिया।मधुरे पवन रस बेनियाँ डोलावेनदिया…
गीत
-
माटी के अँजोर / जितराम पाठक
सूप भरि रूप केसनूख भरि सोहुआ मेंसानल सनेहिया सलोरआन अवरू अपना केनेह-नाता गरगटलहना के बाटुरे बटोर।सोनवा के जाल मेंघेराइल सारी दुनियायोग के वियोग में पेराइल सारी दुनियाकिरन के बानकेहू मारेला अनेरियामाटी के सुवास छिलरावेला अहेरियादेहिया के नाता नधले बाझकझोरियाअन्हरा के…
Recent
गीत-गजले सुनाइब/ रामेश्वर प्रसाद सिन्हा ‘पीयूष’
जहँवा जे पाइब, हिया से लगाइब,हँस-हँस के ना ।गीत – गजले सुनाइब, हँसि-हँस के ना । रहता के बिन-बिन कँटवा हटाइब,हँस-हँस के ना ।फूल अनघा बिछाइब, हँस-हँस के ना । सिसवा के टुकड़ा गिरल जे, उठाइब,हँस-हँस के ना ।ओके अएना…
माइयो के बोलवले आई / बृजमोहन प्रसाद ‘अनारी’
पीयर जनेउवा वालाऽ, पीयरे खंरउवाँ वालाऽ,आरे बाबा हथिया के सूढ़ लटकवले आई.माइयो के बोलवले आई………. दाँये शुभऽ बाँये लाभऽ, आगे रिधि पाछे सिधि,आरे बाबा शुभ के सनेश भेजववले आई,बाबूओ के लिअवले आई………. फलऽ मोतीचूर खातऽ, पान खाके मुसुकातऽआरे बाबा मुसवा…