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हें बरखा/ रामाज्ञा प्रसाद सिंह ‘विकल’

adminOct 4, 20241 min read

हे बरखा तूं फार के छप्पर ढेर लगा द मोती के ! नया हुकुमत रहल ना सुझबुझ,लड़िका बिलखल कहके भुख-भुख,रोअल रोंआ देख के ई दुख;ओहि समय अंखिया दिइलस कुछ मइया के सूखल छाती धड ठुनुकल लड़िका गोदी के !खुस भइनी…

बरदान तनिका दे द / कन्हैया लाल पण्डित

अलचार हो रहल मन वरदान तनिका दे द।थाकल शरीर जननी, अब जान तनिका दे द॥पहिले के शक्ति कहवाँ अब आज रह गइल बा।फेनू लगा के हाथ तूँ तूफान तनिका दे द॥पग अझुरा रहल बाटे आ नगिचा किनार के।खोलऽ पलक भवानी…

राम : एक अखंड अवतार-चेतना – दिनेश पाण्डेय

adminSep 26, 202410 min read

अवतार के साँच ‘अवतार’ शब्द के प्राचीन प्रयोग यजुर्वेद में प्राप्त बा- “उप ज्मन्नुप वेतसेऽवतर नदीष्वा। अग्ने पित्तमपामसि मण्डुकि ताभिरागहि सेमं नो यज्ञं पावकवर्णं शिवं कृधि– (यजु० १७.६) ।” [ अग्नि! धरती में से ऊपर आईं, बड़वागि का जवरे नदियन…

देवर-भाभी संवाद/ देवेन्द्र आर्य

adminSep 26, 20242 min read

सुरुज के डुबलेकिरिनिया के सुतले,भउजी न छोडि़हा दुआर होखेते-खलिहाने तू अकेले जिनि जइहाढुकल होइहें हुड़ार हो दाग लगि जाई जे इज्जतिया पर तोहरेझुकी गरदनिया हमार होनीक बाउर, रुख-सूख जउने हम कमाइबओतने में चली घर-बार हो हुड़रा के डरडर ओसे कहीं…

असहिं का वृद्ध लो के होई दुरगतिया – आकाश महेशपुरी

adminSep 26, 20242 min read

जन्म लेते पूत के उछाह से भरेला हिय, गज भर होइ जाला फूलि के ई छतिया। पाल-पोस के बड़ा करेला लोग पूत के आ, नीमने से नीमने धरावे इसकुलिया। होखते बियाह माई-बाप के बिसार देला, तबो माई-बाप दें आषीश दिन-रतिया।…

कविता

आमवा से अमरित टपके/…

आमवा से अमरित टपके/…

आमवा से अमरित टपके ,चह-चह चहके चिरइयाँ.महुआ सुगंध में मातल,कुकू…

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आवे बसन्त दुअरिया /…

आवे बसन्त दुअरियामगन मन नाचले गोरिया।मधुरे पवन रस बेनियाँ डोलावेनदिया…

आस सगरी गरीबन कऽ…

आस सगरी गरीबन कऽ…

जइसे पपिहा कऽ जिनगी सेवाती हवेआस सगरी गरीबन कऽ थाती…

इकिसवी सदी में चलल…

इकिसवी सदी में चलल…

इकिसवी सदी में चलल गांव देखींगरीबी लाचारी से भरल गांव…

गीत

आदमी के हाथ में जब नाथ…

आदमी के हाथ में जब नाथ…

आदमी के हाथ में जब नाथ बाटेतब कवन…

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ऋतु गीत

कुहुकि-कुहुकि कुहकावे कोइलिया,कुहुकि-कुहुकि कुहुकावे।। पतझड़ आइल, उजड़ल बगिया,मधु…

का कहीं

का कहीं

तार तार लूँगा बा, झूला बा, का कहीं ?देहिं…

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बलिदानी वीर भूमि/ प्रभास चन्द्र कुमार सिंह

बलिदानी वीर भूमि/ प्रभास चन्द्र कुमार सिंह

adminOct 4, 20241 min read

जरासंध वीर जहाँ, रहले दलगीर जहाँ,बाटे राजगीर जहाँ, उहे बिहार हऽ । खुद भगवान जहाँ, लोहा गइले मान जहाँ,देख वीरता महान जहाँ, उहे बिहार ह5 | भीम गइले थाक जहाँ, कृष्ण दशा आँक जहाँ,कइले खर्ह दुई फाँक जहाँ, उहे बिहार…

धर्माचरण/ प्रभास चन्द्र कुमार सिंह

धर्माचरण/ प्रभास चन्द्र कुमार सिंह

adminOct 4, 20241 min read

सिख मुसलमान जहाँ, इसाई हिन्दूवान जहाँ,रहत भी समान जहाँ, उहे बिहार ह5 | आदिवासी थारु जहाँ, उराँव संथारू जहाँ,चेरो खरवारू जहाँ, उहे बिहार हऽ । धार्मिक त्योहार जहाँ, उत्सव लोकाचार जहाँ,सौहार्द्र-व्यवहार जहाँ, उहे बिहार हऽ आपसी सद्भाव जहाँ, हेल-मेल भाव…