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अबकी बार लतिआवल जइब/ ब्रज मोहन राय ‘देहाती’

adminOct 4, 20241 min read

अबकी बार लतियावल जइब,गंगा में धकियावल जइब,संसद से घेंटियावल जइब,हाजत में सँठियावल जइब । खूब बढ़वल दाढ़ी-मोछ,हनुमान अस लमहर पोंछ,कइल ना जनता के सोच,चलते ठेहुन आइल मोच,सोंचला पर घटियावल जइब । लूट डकइती मारा-मारी,धाका – धुक्की, खइल घूस,केहू कहल हईं…

बचपनवा/ आदित्य दूबे

adminSep 26, 20241 min read

बाबूजी बइठावे हमके कान्हे पतितली उड़ावे जाईं बान्हें पनून तेल रोटी बड़ा भावेला।बचपनवा इयाद बड़ा आवेला॥ पढी लिखीं पटरी इसलेट पसांझी के नहाए जाईं पूले पखेतवा बगइचवा बोलावेला।बचपनवा इयाद बड़ा आवेला॥ दुई चार रहले संघातीरोज जाईं खेले ओल्हा पातीभूतहा इनार…

शब्द के कथा – प्रिंस रितुराज दुबे

adminSep 27, 20241 min read

शब्द के चलऽ कथा सुने आ बुझल जव केतन बा बलशब्दे जिनगी के माने हऽ, शब्दे ह जिनगी कऽ ज्ञानशब्दे से ह आत्मा, शब्दे ह परमधामशब्दे से बुझगर बुझाल, शब्द से बुझाए अनुशासनशब्द से मानुस के आचरण बुझाला, शब्दे से…

नदी के किनारा/ सत्यनारायण सिंह

adminSep 30, 20241 min read

जब जब डूबेला नदी के किनारापानी बहेला कि जइसे आवारा खोजले मिलेला ना जिनगी भुलाइलहरियर ना होखेला, फुलुंगी सुखाइलगरदिस में लौके ना जइसे सितारा जागेला लहरन के मन में पिरितियाज्ञानी परासर भी भूल जाला रितियापागल बना देला जइसे इशारा लागेला…

दू दिन जिन्दगानी/ डॉ॰ भगवान सिंह ‘भास्कर’

adminOct 4, 20241 min read

उड़ालs मौज मस्ती दू दिन जिन्दगानी । हँसत खेलत में बाबू बचपन गुजरलऽमाई-बाप के कान्ह पर चढ़ि के नचलऽ । ना कवनो सोच फिकिर ना रहे हरानीउड़ालs मौज मस्ती दू दिन जिन्दगानी ।। जब आइल जवानी गुलछर्रा उड़वलऽबम्बई दिल्ली कलकत्ता…

कविता

  • माटी के अँजोर / जितराम पाठक

    सूप भरि रूप केसनूख भरि सोहुआ मेंसानल सनेहिया सलोरआन अवरू अपना केनेह-नाता गरगटलहना के बाटुरे बटोर।सोनवा के जाल मेंघेराइल सारी दुनियायोग के वियोग में पेराइल सारी दुनियाकिरन के बानकेहू मारेला अनेरियामाटी के सुवास छिलरावेला अहेरियादेहिया के नाता नधले बाझकझोरियाअन्हरा के…

आपन हमदर्द/ दीपक तिवारी

आपन हमदर्द/ दीपक तिवारी

माई जइसन,प्यार करे,ना करि केहू,आपन हमदर्द,चाहें केतनो, होई सेहूँ। माई…

आमवा से अमरित टपके/…

आमवा से अमरित टपके/…

आमवा से अमरित टपके ,चह-चह चहके चिरइयाँ.महुआ सुगंध में मातल,कुकू…

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आवे बसन्त दुअरिया /…

आवे बसन्त दुअरियामगन मन नाचले गोरिया।मधुरे पवन रस बेनियाँ डोलावेनदिया…

आस सगरी गरीबन कऽ…

आस सगरी गरीबन कऽ…

जइसे पपिहा कऽ जिनगी सेवाती हवेआस सगरी गरीबन कऽ थाती…

गीत

  • माटी के अँजोर / जितराम पाठक

    सूप भरि रूप केसनूख भरि सोहुआ मेंसानल सनेहिया सलोरआन अवरू अपना केनेह-नाता गरगटलहना के बाटुरे बटोर।सोनवा के जाल मेंघेराइल सारी दुनियायोग के वियोग में पेराइल सारी दुनियाकिरन के बानकेहू मारेला अनेरियामाटी के सुवास छिलरावेला अहेरियादेहिया के नाता नधले बाझकझोरियाअन्हरा के…

आदमी के हाथ में जब नाथ…

आदमी के हाथ में जब नाथ…

आदमी के हाथ में जब नाथ बाटेतब कवन…

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ऋतु गीत

कुहुकि-कुहुकि कुहकावे कोइलिया,कुहुकि-कुहुकि कुहुकावे।। पतझड़ आइल, उजड़ल बगिया,मधु…

का कहीं

का कहीं

तार तार लूँगा बा, झूला बा, का कहीं ?देहिं…

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गीत-गजले सुनाइब/ रामेश्वर प्रसाद सिन्हा ‘पीयूष’

गीत-गजले सुनाइब/ रामेश्वर प्रसाद सिन्हा ‘पीयूष’

adminOct 4, 20241 min read

जहँवा जे पाइब, हिया से लगाइब,हँस-हँस के ना ।गीत – गजले सुनाइब, हँसि-हँस के ना । रहता के बिन-बिन कँटवा हटाइब,हँस-हँस के ना ।फूल अनघा बिछाइब, हँस-हँस के ना । सिसवा के टुकड़ा गिरल जे, उठाइब,हँस-हँस के ना ।ओके अएना…

माइयो के बोलवले आई / बृजमोहन प्रसाद ‘अनारी’

माइयो के बोलवले आई / बृजमोहन प्रसाद ‘अनारी’

adminOct 4, 20241 min read

पीयर जनेउवा वालाऽ, पीयरे खंरउवाँ वालाऽ,आरे बाबा हथिया के सूढ़ लटकवले आई.माइयो के बोलवले आई………. दाँये शुभऽ बाँये लाभऽ, आगे रिधि पाछे सिधि,आरे बाबा शुभ के सनेश भेजववले आई,बाबूओ के लिअवले आई………. फलऽ मोतीचूर खातऽ, पान खाके मुसुकातऽआरे बाबा मुसवा…