के के देखाईं चुनरिया / जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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अँगना छिंटाइल अंजोरिया हो रामा
 मन मधुवाइल।

अमवा के मोजरी से कोइलर के बोलिया
चढ़त चइतवा में ताना देव छलिया

सम्हरे न आपन नजरिया हो रामा
 मन मधुवाइल।

मनवा रंगल बाटे संइयाँ के रंग में
उठेला सिरहिरी मोरा अंग-अंग में

कइसे सजायीं सेजरिया हो रामा
 मन मधुवाइल।
मधुर पवन अब मधुमय भइलें
भँवरा सजन मोर कतों न देखइलें

केके देखाई चुनरिया हो रामा
 मन मधुवाइल।

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के के देखाईं चुनरिया / जयशंकर प्रसाद द्विवेदी - भोजपुरी मंथन