भोजपुरी के अपनावल सीखा / राम बहादुर राय
झूठहीं सपना देखावल छोड़ा
धरती गगन लिखावल छोड़ा।
अहंकार से भरले बाड़ा बबुआ
हमके अउर सीखावल छोड़ा।
हमनी के भाषा भोजपुरी हवे
एकरा के तूहूं अपनावल सीखा।
हर जगह मोह माया भरल बाटे
अंग्रेजी के माया से उपर होखा ।
अब तक जवन कईला त कईला
अबहूं से गोल-गोल घुमावल छोड़ा।
जाति-धर्म के अगिया लगववला
घरियाली आंसू तूं बहावल छोड़ा।
देवाल पर सदविचार लिखात बा
“अकेला” तूहूंवु अपनावल सीखा।