हमर आन, मान आ शान मधेश/ डॉ गोपाल ठाकुर
मधेश हमर आन बा मधेश हमर मान रे
शान एकर उँचा रहे हमर इहे अरमान रे
कोशी, गंडकी, कर्णाली, मेची से महाकाली
चुरिआ से तराई ले रूप एकर निराली
थारू -बाजी- बौद्ध-हिंदू-सिख-मुसलमान रे ॥शान एकर० ॥
अन के भंडार बा जङल के हरियाली
पुण्यभूमि देवर्षि ब्रह्मर्षि- राजर्षिवाली
सीता-जनक- सलेस-बुद्ध दुनिआ में महान रे ॥शान एकर० ॥
चमक एकर रहे अटल चाँद सुरुज का सङे
दासता में ना रहे कौनो फिरङी का सङे
चल मधेशी जान कर मधेश ला कुर्बान रे ||शान एकर० ॥