• Home
  • अनिल ओझा 'नीरद'
का कहीं
का कहीं

तार तार लूँगा बा, झूला बा, का कहीं ?देहिं तोपल-ढांकल त मुश्किल बा,का कहीं?? माथ पर ईंटा, कबों सिरमिट…

ना आइल
ना आइल

ठकुरसुहाती अबले भइया, हमरा गावे ना आइल ।खुद कबहूँ, हंसनी ना त, दोसरो के हँसावे ना आइल।। सोचते…

अनिल ओझा 'नीरद' - भोजपुरी मंथन