केतना कदम के डार हम रहनी अगोर केतबहूँ तोहार बाँसुरी बाजल न भोर के कब तक घिरल अन्हार…
बन्दौ शाक्य कुमार, जाहि जन्म संवाद सुनि।उमड़ल हर्ष अपार, शुद्धोदन सम्राट उर ॥ 1 ॥ कीन्ह दान परमार्थ,…
आदमी के हाथ में जब नाथ बाटेतब कवन चिंता प्रलय के साथ बाटे।उठ रहल आवाज-’’अब त हाथ रोकगोड़…
कुहुकि-कुहुकि कुहकावे कोइलिया,कुहुकि-कुहुकि कुहुकावे।। पतझड़ आइल, उजड़ल बगिया,मधु ऋतु में टुसिआइल फुलुंगिया।इन हरियर-हरियर पलइन में,सुतल सनेहिया जगावे कोइलिया।।…