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हम तोहरा, तूँ हमरा मन में…
हम तोहरा, तूँ हमरा मन में…

जब देखीं भितरी दरपन मेंतूँ लउकेलऽ, हमरा जगहाहम तोहरा, तूँ हमरा मन में ! नीमन बाउर कुछ न बुझालारीझत…

रस ना बुझाइल / अशोक द्विवेदी
रस ना बुझाइल / अशोक द्विवेदी

गते-गते दिनवाँ ओराइल हो रामारस ना बुझाइल। अँतरा क कोइलर कुहुँकि न पावेमहुवा न आपन नेहिया लुटावेअमवो टिकोरवा…

उनुका से कहि दऽ / अशोक…
उनुका से कहि दऽ / अशोक…

उनुका से कहि दऽ / डॉ अशोक द्विवेदी रसे-रसे महुवा फुलाइल हो रामाउनुका से कहि दऽ।रस देखि भँवरा…

चिट्ठी / अशोक द्विवेदी
चिट्ठी / अशोक द्विवेदी

हम तोहके कइसे लिखीं?कइसे लिखीं किबहुते खुश बानी इहाँ हमहोके बिलग तोहन लोग से… हर घड़ी छेदत-बीन्हत रहेलाइहवों…

चइत के छन्द / अशोक द्विवेदी
चइत के छन्द / अशोक द्विवेदी

कोइलरि कूहे अधिरतिया आ बैरीचइत कुहुँकावे.रहि रहि पाछिल बतिया इ बैरीचइत उसुकावे. कुरुई-भरल-रस-महुवा, निझाइलकसक-कचोटत मन मेहराइलउपरा से कतना…

बसन्त फागुन / अशोक द्विवेदी
बसन्त फागुन / अशोक द्विवेदी

धुन से सुनगुन मिलल बा भँवरन केरंग सातों खिलल तितलियन केलौट आइल चहक, चिरइयन के! फिर बगइचन के…

अशोक द्विवेदी - भोजपुरी मंथन