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सुनीं कन्हाई / जलज कुमार अनुपम

सुनीं कन्हाई / जलज कुमार अनुपम

हे स्वामीकरुना के सागर!भरल रहे हियरा में हरदमभक्ती के, बिसवास के गागर ! बदल गइल परिभासा बहुतेनेह-त्याग केगीत-राग केमतलब के दलदल में सगरोसगरी दुनिया धँसले लउकेआदमियत बा सुसुके लागलबुतल जात बा दियरी, देखींसत् अंजोर के,परोपकार केसत्य-ज्ञान केस्वाभिमान के !भइल जात बा लोग…

सास पतोहि के झगड़ा/ दीपक तिवारी

सास पतोहि के झगड़ा/ दीपक तिवारी

ByadminSep 24, 20241 min read

सास पतोहि के घर के झगड़ा कबो ना ओराई,भूल के केहू कबो केहु के ना करिलो बड़ाई। घर घर के विथा कहानी बहुते दुःख दाई बा,केकरा के समझावल…

सावन सूतल भागल भादो / कमला प्रसाद मिश्र ‘विप्र’

सावन सूतल भागल भादो / कमला प्रसाद मिश्र ‘विप्र’

सावन सूतल भागल भादोशरद शुभ आइल हे!बुलुकि-बुलुकि रोइ के बदरा चुपाइल,नदी-ताल-तलइयन के ओठा झुराइल।झँखत झिंगुरवा कोना अँतरा लुकाइल,कास बुढ़ाइल हे, घरद शुभ आइल हे!उगल अगस्त आ आकाश…

सावन सुहागन/ ब्रजेन्द्र कुमार सिन्हा

सावन सुहागन/ ब्रजेन्द्र कुमार सिन्हा

ByadminOct 4, 20241 min read

सावन सुहागननिरखे अंचरवा,चल भइली विरहिन – भेष ?मास भदउआना लागे भयावनविरहिन उठे ना कलेश.धानी रे चदरियारंग दुपहरियाधरी ले ली जोगिनी के भेष.सुपुली के सोनवाभइले सपनवाचल पिया बसे…

सावन – गुलरेज शहजाद

सावन – गुलरेज शहजाद

ByadminSep 26, 20241 min read

“बदरी के बदरा पिठियवलस”श्याम रंग में मौसम गावेआसमान के खोंखी उखड़ललागल बरसे झमझम बूनीलागे जइसे छमछम करतगोरिया अइलीजंगला धइले देखs तानींआई हो दादाआहा हा हा …. पड़ल…

सामयिक रचना/ यमुना तिवारी ‘व्यथित’

सामयिक रचना/ यमुना तिवारी ‘व्यथित’

ByadminOct 4, 20241 min read

संसद पर कइलसजवन आतंकी चढ़ाई,ओकरो के देशवा मेंफाँसी ना दिआई ।सुरसा के मुँह असबढ़ता महंगाई,नंगा निचोड़ी काका ऊ नहाई ?सामाजिक समरसता केदेके दुहाई,आरक्षन के नाम परहोत बा…

सानेट: अहिंसा / मोती बी.ए.

सानेट: अहिंसा / मोती बी.ए.

Byमोती बी.ए.Apr 4, 20251 min read

अहिंसक बाघ जो होखे बड़ाई सब करी ओकरअहिंसा के महातन के सुनी बकरी के मुँहें सेपुजाली देस में दुर्गा सवारी बाघ ह जेकरनहालें व्यालमाली नित्य गंगाजल से…

साँच के आँच / केशव मोहन पाण्डेय

साँच के आँच / केशव मोहन पाण्डेय

बड़ा तेज लागेलासाँच के आँचबड़ा अजीब होलाअसर एकरकाहें किसभे ना करेला साहससाँच कहे केसाँचसबके जहर लागेलातबे अच्छा-अच्छा लोगसाँच से भागेला।अब देखीं नासभे पूजा कहेलाप्रीत के त,मधुर मानेला…

सागर से भेंट/ डॉ॰ शारदा पाण्डेय

सागर से भेंट/ डॉ॰ शारदा पाण्डेय

ByadminOct 1, 20241 min read

सुख तबले बाँझं रही,जब ले दुःख से बतिआई ना ।जगि त ईहे ह किजमुना के धार, गंगा में समाईतवे ओकरा के सागर भेंटाई ॥ adminbhojpurimanthan.com/

सवालन में लोकतंत्र – गंगाशरण शर्मा

सवालन में लोकतंत्र – गंगाशरण शर्मा

ByadminSep 26, 20241 min read

गणित में बा आंकड़न के महत्व लोकोतंत्र में बा आंकड़न के सम्मान  बाकिर जब खेले लागनस आंकड़ा धर्म जाति संप्रदाय के गोटी मिटे लागेला सामूहिक -निरपेक्षता -एकता…

कविता/ गीत / गज़ल - भोजपुरी मंथन - Page 2