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आ गइलन – भोला प्रसाद ‘आग्नेय’

आ गइलन – भोला प्रसाद ‘आग्नेय’

ByadminSep 27, 20241 min read

जमीन पे नभ से उतर के आ गइलन।सफर के नाम कुछ कर के आ गइलन॥ ख्वाहिश रहे फूलन के खुश्बू के।झोली में काँटे भर के आ गइलन॥ मन में तमन्ना बा अमर होखे के।सभकरा नजर में मर के आ गइलन॥…

असहिं का वृद्ध लो के होई दुरगतिया – आकाश…

असहिं का वृद्ध लो के होई दुरगतिया – आकाश…

ByadminSep 26, 20242 min read

जन्म लेते पूत के उछाह से भरेला हिय, गज भर होइ जाला फूलि के ई छतिया। पाल-पोस के बड़ा करेला लोग पूत के आ, नीमने से नीमने…

अशेष प्रेम प्रत्यय / परिचय दास

अशेष प्रेम प्रत्यय / परिचय दास

Byपरिचय दासSep 22, 20243 min read

कई बेर सांझी के बेराबँसवारी के ललचौंह में चुपचाप बइठलएगो छेड़ देईलाँ किस्सा कहनीअढ़उल के फूल के गप्पगुल्लर के पेड़ के अंतरंग अलापपृथिवी के शब्दहीनता के भावआत्मा…

अमृत नीक कहै सब कोई/ धरनीदास

अमृत नीक कहै सब कोई/ धरनीदास

ByधरनीदासSep 26, 20241 min read

अमृत नीक कहै सब कोई, पीय बिना अमर नहिं होई। कोई कहै अमृत बसै पताल, नर्क अंत नित ग्रासै काल।कोई कहै अमृत समुंदर माहिं, बड़वाअगिन क्यों सोखत…

अब्बो ले सुपवा बोलेला / जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

अब्बो ले सुपवा बोलेला / जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

ताल तलहटी, गाँव क रहटीकब फूटल किस्मत खोलेलाअब्बो ले सुपवा बोलेला। दिन में खैनी साँझ क हुक्काभोरे आइल साह क रुक्काखेती में जब भयल ना कुछहुअन्दाता फुक्के…

अबहू कुहुकिएके बोले ले कोइलिया / मनोरंजन प्रसाद सिंह

अबहू कुहुकिएके बोले ले कोइलिया / मनोरंजन प्रसाद सिंह

अबहूँ कुहुकिएके बोले ले कोइलिया, नाचेला मगन होके मोर।अबहुँ चमेली बेली फूले अधिरतिआ, हियरा में उठेला हिलोर।।अबहूँ अँगनवाँ में खेलेला बलकवा, कौआमामा चील्हिआ-चिल्होर।अबहूँ चमकिएके चलेले तिरिअवा ताकेले…

अबकी बार लतिआवल जइब/ ब्रज मोहन राय ‘देहाती’

अबकी बार लतिआवल जइब/ ब्रज मोहन राय ‘देहाती’

ByadminOct 4, 20241 min read

अबकी बार लतियावल जइब,गंगा में धकियावल जइब,संसद से घेंटियावल जइब,हाजत में सँठियावल जइब । खूब बढ़वल दाढ़ी-मोछ,हनुमान अस लमहर पोंछ,कइल ना जनता के सोच,चलते ठेहुन आइल मोच,सोंचला…

अब गीत लिखीं कि रीति लिखीं / चंद्रभूषण पाण्डेय

अब गीत लिखीं कि रीति लिखीं / चंद्रभूषण पाण्डेय

अब गीत लिखींकि रीति लिखींसभकर उगिललहम तींत लिखींअन्हरिया पअंजोरिया केछोटकी दियाके जीत लिखींहम मरम लिखींकि करम लिखींकि सभके जातआ धरम लिखींतिरछी नैनाजब बने कटारआपन हिया केहर भरम…

अपना अवकाद से बेसी/ ब्रज मोहन राय ‘देहाती’

अपना अवकाद से बेसी/ ब्रज मोहन राय ‘देहाती’

ByadminOct 4, 20241 min read

अपना अवकाद से बेसी,जोर लगाके,लइका के एम० ए० पास करा देहलीं,ई समझीं कि,बढ़ियात उफिनात नदी में,केहू तरी नाव पार लगा देहलीं,जूता टूट गइल,चप्पल घिस गइल,नोकरी खोजत,अपमान सहत,मन…

अधिगत जागल हो सजनी – संत गुलाल साहब

अधिगत जागल हो सजनी – संत गुलाल साहब

Byगुलाल साहबSep 27, 20241 min read

अधिगत जागल हो सजनी। खोजत-खोजत सतगुरु पावलताहि चरनवाँ चितवा लागल हो सजनी॥ साँझि समय उठि दीपक बारलकरमवा मनुबाँ पागल हो सजनी॥ चललि उबटि बाट, छुटलि दकल घाटगरजि…

कविता/ गीत / गज़ल - भोजपुरी मंथन - Page 29