कविता
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सानेट: अहिंसा / मोती बी.ए.
अहिंसक बाघ जो होखे बड़ाई सब करी ओकरअहिंसा के महातन के सुनी बकरी के मुँहें सेपुजाली देस में दुर्गा सवारी बाघ ह जेकरनहालें व्यालमाली नित्य गंगाजल से दूबी सेसमूचा देस होके एक बोले एक सुर से जोखड़ा हो तानि के…
आदमी से आदमी अझुराइल…
आदमी से आदमी अझुराइल बा।सभे एक दोसरा से डेराइल बा।मिल्लत…
आधी-आधी रात रतिया के…
आधी-आधी रात रतिया के पिहिके पपिहरा से बैरनिया भइली नामोरा…
आधी-आधी रात रतिया के…
आधी-आधी रात रतिया के पिहिके पपिहरा से बैरनिया भइली नामोरा…
आपन हमदर्द/ दीपक तिवारी
माई जइसन,प्यार करे,ना करि केहू,आपन हमदर्द,चाहें केतनो, होई सेहूँ। माई…
गीत
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सानेट: अहिंसा / मोती बी.ए.
अहिंसक बाघ जो होखे बड़ाई सब करी ओकरअहिंसा के महातन के सुनी बकरी के मुँहें सेपुजाली देस में दुर्गा सवारी बाघ ह जेकरनहालें व्यालमाली नित्य गंगाजल से दूबी सेसमूचा देस होके एक बोले एक सुर से जोखड़ा हो तानि के…
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सावन सुहागन/ ब्रजेन्द्र कुमार सिन्हा
सावन सुहागननिरखे अंचरवा,चल भइली विरहिन – भेष ?मास भदउआना लागे भयावनविरहिन उठे ना कलेश.धानी रे चदरियारंग दुपहरियाधरी ले ली जोगिनी के भेष.सुपुली के सोनवाभइले सपनवाचल पिया बसे परदेस.हरी-हरी चुड़ियाहरी रे चुनरियामिली नाहीं अब एही देश.
जुग पुरुष कहावऽ / वेद प्रकाश व्दिवेदी
हो भाई सुनऽ, अपने मत धुनऽ;दोसरो के बतिया के मनवा में गुनऽ । सही बात सोचऽ, मुँहवा मत नोचऽ;बात मत बनावऽ, काम करऽ आवऽ । काम बहुत ढेर बा, हो गइल देर बा;हठ मत ठानऽ, बात असल जानऽ 1 बाबू…