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ना आइल

ठकुरसुहाती अबले भइया, हमरा गावे ना आइल ।खुद कबहूँ, हंसनी ना त, दोसरो के हँसावे ना आइल।। सोचते रहि गइनी,जिनिगी के,रस से सराबोर कई दीं ।हो गइनी नीरस काहें, अतनो त बतावे ना आइल ।। कई बेरि सोचनीं, कि चोटी,…

धुरंधर – कैलाश गौतम

adminSep 26, 20241 min read

बहै फगुनहट उडै धुरंधरसोन किरवा अस मुड़ै धुरंधर। गांव गली बारी बॅसवारीडहरी डारी खेत कियारीनहर क पुलिया ताल किनारेडीह क चउरा नदिया नारेमन्दिर कबौ मदरसा झाकैउचक उचक पोखरा पर ताकैछिन महुआ छिन छिन गुलमोहरआज त ओकर दर्शन नोहरबस मे देह…

भोजपुरी भासा हऽ माई के/ डाॅ. पवन कुमार

adminSep 26, 20241 min read

भोजपुरी भासा हऽ माई केदूध हऽ बकरी के गाई (गाय)केलाठी हऽ बाबू के भाई केझोरी हऽ बाबा के दाई के । दूध के ई छाली हऽ खखोरी हऽबउआ के खीर के कटोरी हऽदही हऽ घीव हऽ डार् ही हऽमही हऽ छेना के थारी…

लोक सुदर्शन संधान/  राधा मोहन राधेश

adminOct 1, 20241 min read

भोर भइल बापू सपना के, भागल भूत अन्हारसूतल सुगना ताके लागल, फड़कलपाँख पुरान ।पिजड़ा के पीड़ाइल चिरई, कबहुं सुछंद उड़ जालेबंदी देहिया तपल साधक के बान्हल ना मन माने,चित्त चेतना हिया-राह के सभकर भीतर के जानसूतल सुगना ताके लागल, फड़कल…

के के देखाईं चुनरिया / जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

अँगना छिंटाइल अंजोरिया हो रामा मन मधुवाइल। अमवा के मोजरी से कोइलर के बोलियाचढ़त चइतवा में ताना देव छलिया सम्हरे न आपन नजरिया हो रामा मन मधुवाइल। मनवा रंगल बाटे संइयाँ के रंग मेंउठेला सिरहिरी मोरा अंग-अंग में कइसे सजायीं सेजरिया हो…

कविता

  • सानेट: अहिंसा / मोती बी.ए.

    अहिंसक बाघ जो होखे बड़ाई सब करी ओकरअहिंसा के महातन के सुनी बकरी के मुँहें सेपुजाली देस में दुर्गा सवारी बाघ ह जेकरनहालें व्यालमाली नित्य गंगाजल से दूबी सेसमूचा देस होके एक बोले एक सुर से जोखड़ा हो तानि के…

आदमी से आदमी अझुराइल…

आदमी से आदमी अझुराइल…

आदमी से आदमी अझुराइल बा।सभे एक दोसरा से डेराइल बा।मिल्लत…

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आधी-आधी रात रतिया के…

आधी-आधी रात रतिया के पिहिके पपिहरा से बैरनिया भइली नामोरा…

आधी-आधी रात रतिया के…

आधी-आधी रात रतिया के…

आधी-आधी रात रतिया के पिहिके पपिहरा से बैरनिया भइली नामोरा…

आपन हमदर्द/ दीपक तिवारी

आपन हमदर्द/ दीपक तिवारी

माई जइसन,प्यार करे,ना करि केहू,आपन हमदर्द,चाहें केतनो, होई सेहूँ। माई…

गीत

  • सानेट: अहिंसा / मोती बी.ए.

    अहिंसक बाघ जो होखे बड़ाई सब करी ओकरअहिंसा के महातन के सुनी बकरी के मुँहें सेपुजाली देस में दुर्गा सवारी बाघ ह जेकरनहालें व्यालमाली नित्य गंगाजल से दूबी सेसमूचा देस होके एक बोले एक सुर से जोखड़ा हो तानि के…

आदमी के हाथ में जब नाथ…

आदमी के हाथ में जब नाथ…

आदमी के हाथ में जब नाथ बाटेतब कवन…

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ऋतु गीत

कुहुकि-कुहुकि कुहकावे कोइलिया,कुहुकि-कुहुकि कुहुकावे।। पतझड़ आइल, उजड़ल बगिया,मधु…

का कहीं

का कहीं

तार तार लूँगा बा, झूला बा, का कहीं ?देहिं…

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सावन सुहागन/ ब्रजेन्द्र कुमार सिन्हा

सावन सुहागन/ ब्रजेन्द्र कुमार सिन्हा

adminOct 4, 20241 min read

सावन सुहागननिरखे अंचरवा,चल भइली विरहिन – भेष ?मास भदउआना लागे भयावनविरहिन उठे ना कलेश.धानी रे चदरियारंग दुपहरियाधरी ले ली जोगिनी के भेष.सुपुली के सोनवाभइले सपनवाचल पिया बसे परदेस.हरी-हरी चुड़ियाहरी रे चुनरियामिली नाहीं अब एही देश.

जुग पुरुष कहावऽ / वेद प्रकाश व्दिवेदी

जुग पुरुष कहावऽ / वेद प्रकाश व्दिवेदी

adminOct 4, 20241 min read

हो भाई सुनऽ, अपने मत धुनऽ;दोसरो के बतिया के मनवा में गुनऽ । सही बात सोचऽ, मुँहवा मत नोचऽ;बात मत बनावऽ, काम करऽ आवऽ । काम बहुत ढेर बा, हो गइल देर बा;हठ मत ठानऽ, बात असल जानऽ 1 बाबू…