हे हरि ! देदीं जहर पी के मर जाईं हमपी के मनसा इ पूरा कर जाई हमहे हरि…. काँचे उमिरिया में अइनि गवनवा सात जनमिया के साथ.जननी ना सेनुर हो जाई सांपिन गारी पिरितिया के बात.माहुर मेहदी से कइसे सवर…
डबाडबा गई है तारों-भरी शरद से पहले की यह अँधेरी नम रात । उतर रही है नींद सपनों के पंख फैलाए छोटे-मोटे ह्ज़ार दुखों से जर्जर पंख फैलाए उतर रही है नींद हत्यारों के भी सिरहाने । हे भले आदमियो !…
हे बरखा तूं फार के छप्पर ढेर लगा द मोती के ! नया हुकुमत रहल ना सुझबुझ,लड़िका बिलखल कहके भुख-भुख,रोअल रोंआ देख के ई दुख;ओहि समय अंखिया दिइलस कुछ मइया के सूखल छाती धड ठुनुकल लड़िका गोदी के !खुस भइनी…
अस मन बूझींहाल गाँव केनिमिया केछुवत बयार केपिपरा तललहरत छाँव के। हुलस-हुलसमन मोरवा नाचेतोतारामरामायन बाँचेउछल-उछल केगुद्दी देखावेकलाकारी निज पाँव के। राग अलापेकोइलर रागीमहोखा बाबाबनल वैरागीबिपत कटे नाआजुओ कहीं सेपपीहा के नेहिल भाव के। भाँति-भाँति केचिरई-चुरुंग, जनभाँति-भाँति केसबके चिंतनभाँति-भाँतिउपचार मिलेलाभाँति-भाँति के…
हारि के वानर सिन्धु कछारबिचारेले के अब प्रान बचाई?फानि पयोनिधि के दस कन्धरके नगरी, जियते चलि जाई?राक्षस के पहरा दिन-रातिसिया के सुराग कहाँ लगि पाई?जो न पता लगिहें त सखासुग्रीव से बोलऽ ना का जा कहाई? adminbhojpurimanthan.com/
जब भोजपुरिया तइयार रही तब रोब केहु कइसे गांठी ।फेर कसऽ लंगोटा तू आपन फेर हाथ में तू लेलऽ लाठी ॥ हमनी के जिनगी झूर भइल ।नेहिया के नगरी दूर भइल।अपनाइत के लमहर रमना-कोसन से कठा धूर भइल ।फेर के…
हवा बताव तू केकरा अँगना से होके अइलू ह ऽसोन सुगंध भरल गगरी कवना पनघट से लइलू हऽ नहा, नहा के चंदन से, नन्दन वन में मुस्कइलू ऽबालक, बूढ़ जवान, तू सबकर हियरा के हरसइलूकवने अमराई से रस ले ले…
हरि नाम सजीवन साँचा, खोजो गहि कै ।। टेक।। रात के बिसरल चकवा रे चकवा, प्रात मिलन वाके होइजो जन बिसरे राम भजन में, दिवस मिलनवा के राती।। ओहि देसवा हंसा करु प्याना, जहाँ जाति ना पाँतीचान सुरुज दु मोसन…